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सर्द हवाओं के बीच इंदौर में ज्योतिष और वास्तुविदों का जमावड़ा

संस्कृति हमारी पुरातन भाषा इसका संरक्षण करें और ज्ञानवर्धन में सहायक बनाएं। इसी प्रकार भारतीय पद्धति से गणितीय कॉल गणना आसान है। हमारी विधाओं को हम पहचाने और इस पर काम करें। संस्कृत विदेश में भी पढ़ाई जाने लगी है। विदेशो के कई विश्वविद्यालय संस्कृत को महत्व देते हैं। वैज्ञानिक अपनी खोज में संस्कृत का प्रयोग निरंतर कर रहे हैं। इसी प्रकार ज्योतिष और वास्तु हमारे प्राचीनतम कई ग्रंथ लिखे गए हैं जिसमें भ्रांतियां ना ही सन्शय है। यह मार्गदर्शन के रूप में हमारे जीवन को श्रेष्ठतम अवसर प्रदान करने में सहायक है। यह विचार संस्कृत कॉलेज में अतिथियों के द्वारा व्यक्त किए गए।
शासकीय संस्कृत महाविद्यालय इंदौर में ज्योतिष एवं वास्तु विषय पर आधारित एक दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी सर्द हवाओ के बीच शुरू हुई। इसमें देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी तथा ज्योतिष-वास्तु के विद्वानों ने समसामयिक विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सुबह से शाम तक वेद रिचाओं की सूक्तियां, संस्कृत, मानस की चौपाइयां से माहौल गूंज मान रहा।
संगोष्ठी के संयोजक पं. योगेंद्र महंत, समन्वयक आचार्य गोपालदास बैरागी तथा डॉ अभिषेक पांडेय ने बताया कि इंदौर के तपस्वी सन्तों के सान्निध्य में आयोजन शुरु किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक उषा ठाकुर प्राचार्य डॉ.तृप्ति जोशी थी। मुख्य वक्ता महर्षि महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के चेयरमैन भरत बैरागी (केबिनेट मंत्री दर्जा) तथा विक्रम विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर रहेंगे। अध्यक्षता महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय मेनन प्रमुख रूप से अपना मार्गदर्शन कार्यक्रम में दे रहे हैं। समापन सत्र के मुख्य अतिथि तिरुपति विश्वविद्यालय के आचार्य कृष्णकांत भार्गव थे। विशेष अतिथि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ राजेश वर्मा,, मप्र ज्योतिष संघ के अध्यक्ष रामचन्द्र शर्मा वैदिक, संगोष्ठी निदेशक डॉ. विनायक पाण्डेय, कृपाराम उपाध्याय (भोपाल) आदि ने महत्वपूर्ण जानकारी दी और जिज्ञासाओं को शांत किया ज्योतिष के भ्रम को दूर किया।
एक देश, एक तिथि, एक दिन हो

पं. योगेंद्र महंत ने कहा कि भारत सनातन संस्कृति का देश है। हमारे यहां अक्सर ऐसी स्थिति निर्मित होती है जिससे लोग भ्रम की स्थिति मे आ जाते हैं। आज आवश्यकता है पंचांग और कैलेंडर के जानकारी को एकत्रित करने की, जिससे कि एक देश, एक दिन मे एक तिथी निर्धारित किया जा सके जिससे कि आमजन में भ्रम की स्थिति नहीं रहेगी और तिज त्यौहार भी उत्साह के साथ मनाए जा सकेंगे।

34 पंचांगो की विशेषता पर होगा मंथन

कपिल शर्मा, विनीत त्रिवेदी, कमलेश्वर सिंह सिसौदिया ने बताया कि संगोष्ठी में देश के राजस्थान हिमाचल प्रदेश उत्तर प्रदेश उत्तराखंड आंध्र प्रदेश छत्तीसगढ़ उड़ीसा आदि से कई प्राध्यापकों अनुसंधानकर्ताओं ज्योतिषी कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं। अब तक देश के विभिन्न शहरों और विश्वविद्यालयों से लगभग 400 ज्योतिषी तथा वास्तुविद इस आयोजन के सहभागी बने। इनमें से कई विद्वानों ने तीन अलग-अलग सत्रों में विभिन्न विषयों पर अपने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में देश के लगभग 34 पंचांग निर्माताओं ने भी अपने पंचांगों की विशिष्टता पर प्रकाश डाला।

शकुन शास्त्र, कृष्णमूर्ति पद्धति के जानकार भी आए

सम्मेलन में ज्योतिष और वास्तु के संबंधित विभिन्न भ्रमों का निवारण भी किया। साथ ही ज्योतिष की विभिन्न विधाओं जैसे फलित ज्योतिष, चिकित्सा ज्योतिष अंकशास्त्र, हस्तरेखा शास्त्र, शकुनशास्त्र, कृष्णमूर्ति पद्धति, फेंगशुई, टैरोकार्ड, रमलशास्त्र, वास्तुशास्त्र के देशभर के मूर्धन्य विद्वान सम्मिलित हुए। इन विषयों पर प्रस्तुत हुए प्रमुख रिसर्च पेपर….

-पितृ दोष, संतान उत्पत्ति में रुकावट
-नि:संतनता का प्राचीन पद्धति से उपाय
-मन की चंचलता और एकाग्रता के लिए चंद्रमा प्रभावकारी
-तलाक के कारण
-अवैध संबंध या लिवइन रिलेशनशिप, शुक्र का दूषित होने के साथ राहु का पीड़ित होना
-गृह कलेश और वास्तु दोष
-मंगल दोष नहीं योग, 60 फ़ीसदी पत्रिका मांगलिक, इससे डरने की आवश्यकता नहीं
-रोजगार और कैरियर सृजन में ज्योतिष सहायक, मार्गदर्शक, पथ प्रदर्शक

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