इन्दौर से शिर्डी 425 किलोमीटर की यात्रा 13 दिन में पैदल तय करेंगे सांई भक्त

श्री इन्दौर शहर सांई भक्त सेवा समिति के तत्वावधान में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली सांई पदयात्रा महोत्सव इस वर्ष 25 दिसंबर से 6 जनवरी तक आयोजित की जाएगी। इस 13 दिवसीय यात्रा में सभी सांई भक्त इन्दौर से शिर्डी पदयात्रा कर पहुचेंगे। पदयात्रा में इस वर्ष सभी सांई भक्त इन्दौर से शिर्डी तक के मार्ग में सभी रहवासियों और क्षेत्रवासियों को सामाजिक सरोकार का संदेश भी देंगे। सांई पदयात्रा महोत्सव में भक्त बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता अभियान के साथ ही बाबा के वचनों और संदेशं को भी जन-जन तक पहुंचेंगे। श्री इन्दौर शहर सांई भक्त सेवा समिति अध्यक्ष छोटू शुक्ला एवं प्रकाश तोमर ने बताया कि इन्दौर से शिर्डी पदयात्रा महोत्सव के लिए 250 से अधिक सांई भक्त अपना पंजीयन करवा चुके हैं। इन पंजीयन में महिला, पुरूषों के साथ ही वृद्ध और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। 13 दिवसीय इस पदयात्रा में सभी सांई भक्त इन्दौर से शिर्डी 425 किलोमीटर की यात्रा पैदल तय करेंगे। साथ ही सांई भक्त इस पदयात्रा के दौरान एक दिन में 35 से 40 किलोमीटर का सफर तय कर अपने पहले पड़ाव महू पहुंचेंगे। सांई पदयात्रा में शामिल सभी भक्तों के रहने, ठहरने की व्यवस्था समिति द्वारा 12 पड़ावों पर की गई हैं। इस वर्ष पदयात्रा में मालवा व निमाड़ के भक्त भी इस यात्रा में शामिल होने इन्दौर पहुंच रहे हैं। 13 दिवसीय यात्रा के लिए समिति द्वारा अलग-अलग समितियों का गठन भी किया गया है। इन समितियों में भोजन, मंच, रथ-पूजा, यातायात, आवास, टेंट, आवास समिति के साथ ही चिकित्सा समिति भी बनाई गई है। इन समितियों में 5 से अधिक सांई भक्तों को यह सेवा कार्य सौंपा गया है। समिति से जुड़े सतीश बंसल एवं गोविंद वर्मा, वीरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि 13 दिवसीय सांई पदयात्रा महोत्सव की शुरूआत सोमवार 25 दिसंबर को सुबह 9.30 बजे शोभायात्रा एवं सांई बाबा की महाआरती के साथ होगी। महाआरती में संत समाज के साथ ही बड़ी संख्या में भक्त शामिल होंगे। शोभायात्रा बड़ा गणपति मंदिर से प्रारंभ होकर राजमोहल्ला, गंगवाल, बियाबानी, महूनाका, रणजीत हनुमान, द्वारकापुरी, गोपूर चौराहा, रेत मंडी होते हुए आईपीएस स्कूल पहुंचेगी। जहां इस शोभायात्रा का समापन होगा। शोभायात्रा के समापन के पश्चात सभी 250 सांई भक्त यहां से अपनी पैदल इन्दौर से शिर्डी तक की यात्रा का सफर तय करेंगे। सांई भक्तों का पहला पड़ाव महू रहेगा। वहीं सुबह और शाम को भजन-कीर्तन कर भक्त अपने अगले पड़ाव के लिए आगे बढ़ेंगे।

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